यशु जान
Yashu Jaan
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यशु जान

यशु जान (9 फरवरी 1994-) एक पंजाबी कवि और लेखक हैं। वे जालंधर सिटी से हैं। उनका पैतृक गाँव चक साहबू अप्प्रा शहर के पास है। उनके पिता जी का नाम रणजीत राम और माता जसविंदर कौर हैं । उन्हें बचपन से ही कला से प्यार है। उनका शौक गीत, कविता और ग़ज़ल गाना है। वे विभिन्न विषयों पर खोज करना पसंद करते हैं। वे अपनी उपलब्धियों को अपनी पत्नी श्रीमती मृदुला के प्रमुख योगदान के रूप में स्वीकार करते हैं।


हिन्दी कविता यशु जान

जब ये दिल किसी की
ये किस कदर प्यार करते हैं
थक गया हूँ
फ़ेसबुक मौत का घर
घनघोर अशुद्धियां
इतिहास के पन्नों में हमारा भी नाम

उत्तम ग़ज़लें और कविताएं यशु जान

इरादा
इरादे नेक नहीं थे
एक बीमारी
कामयाबी
काश मौत की भी
कुदरत
खूंखार
ज़माना कहां चला गया
ग़ुनाह
ज़माना कहां चला गया
ज़िन्दग़ी के कुछ सवाल
तूफ़ान
तेरी यादों का समंदर
तेरे ग़म चले आये
प्यार से रहो
बेवकूफ़ी
भगवान्
मुख में राम
मुश्किल में इंसान
यारों की याद
ये मेरी ज़िद है
रखो लाज मेरी गुरु नानक
राजनीति दलदल है
श्री राम का नाम होता है
राम-राम करते
रूह प्यासी श्री राम के दीदार की
सरकार
हम जिसे अपना बना लेते हैं
हम दरबदर भटकते रहे उनकी तलाश में

बाल कविताएँ यशु जान

एक खिलौना मुझको ले दो
आम खाऊं मैं पीला-पीला
आसमान और तारे
घर में नन्ही किलकारियां
तितलियाँ
कुदरत का वरदान हैं बच्चे
बारिश आई चलो नहाएं
घर में है एक बिल्ली काली
देश की बेटियों के नाम
सब पढ़कर बनो महान बच्चों
बच्चे नाज़ुक कली हैं होते
मेरा साईकल मेरा साथी
मुझे मिली हैं नई किताबें
रोज़ एक कविता को गाओ
मुफ़्त शिक्षा कब देगी हमें सरकार
अच्छी किताबें अच्छी मित्र
कुदरत ने हमें बहुत दिया है
मैंने घर में रखा हुआ है मिट्ठू तोता
विचारधारा आगे सौंपना
गर्मी का महीना बहुत बुरा
माँ मुझे मरने मत देना
मेहनत करती चींटी देखी
अब जीत हमारी पक्की है
आओ सच्चाई के संग चलें
झूठ के प्रहार से बचो
 
 
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