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गोपालदास नीरज
Gopal Das Neeraj
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गोपालदास नीरज

गोपाल दास नीरज (४ जनवरी १੯२४ -) हिंदी साहित्य के जाने माने कवियों में से हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा जिला के गाँव पुरावली में हुआ । उनकी काव्य पुस्तकों में दर्द दिया है, आसावरी, बादलों से सलाम लेता हूँ, गीत जो गाए नहीं, नीरज की पाती, नीरज दोहावली, गीत-अगीत, कारवां गुजर गया, पुष्प पारिजात के, काव्यांजलि, नीरज संचयन, नीरज के संग-कविता के सात रंग, बादर बरस गयो, मुक्तकी, दो गीत, नदी किनारे, लहर पुकारे, प्राण-गीत, फिर दीप जलेगा, तुम्हारे लिये, वंशीवट सूना है और नीरज की गीतिकाएँ शामिल हैं। गोपाल दास नीरज ने कई प्रसिद्ध फ़िल्मों के गीतों की रचना भी की है।


गोपालदास नीरज की रचनाएँ/कविताएँ

अब के सावन में शरारत ये मेरे साथ हुई
अब तुम रूठो, रूठे सब संसार
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए
अधिकार सबका है बराबर
अस्पृश्या
अंधियार ढल कर ही रहेगा
आज जी भर देख लो तुम चाँद को
आज मेरे कंठ में
आदमी को प्यार दो
आदि पुरुष
उद्जन बम्ब के परीक्षण पर
उनकी याद हमें आती है
उसकी अनगिन बूँदों में
एक जुग ब'अद शब-ए-ग़म की सहर देखी है
एक तेरे बिना प्राण ओ प्राण के !
एक विचार
ओ प्यासे
ओ प्यासे अधरोंवाली
ओ बादर कारे
ओ हर सुबह जगाने वाले
कोई मोती गूँथ सुहागिन
खग! उडते रहना जीवन भर
खुशबू सी आ रही है इधर ज़ाफ़रान की
गीत-नीरज गा रहा है
गुमनामियों मे रहना, नहीं है कबूल मुझको
चलते-चलते थक गए पैर
चार विचार
चाह मंज़िल की
छ: रुबाइयाँ
छिप-छिप अश्रु बहाने वालो
जब चले जाएंगे लौट के सावन की तरह
जब भी इस शहर में कमरे से मैं बाहर निकला
जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना
जा में दो न समायँ
जितना कम सामान रहेगा
जिस दिन तेरी याद न आई
तन तो आज स्वतंत्र हमारा
तब तुम आए
तब मेरी पीड़ा अकुलाई
तमाम उम्र मैं इक अजनबी के घर में रहा
तसवीर बन गया
तिमिर ढलेगा
तुम झूम झूम गाओ
तुम दीवाली बनकर जग का तम दूर करो
तुम्हारे बिना आरती का दीया यह
तू उठा तो उठ गई सारी सभा
दर्द दिया है
दिया जलता रहा
दीप और मनुष्य
दुख के दिन
दुख ने दरवाज़ा खोल दिया
दुनिया के घावों पर
दूर नहीं हो
दूर से दूर तलक एक भी दरख्त न था
दो रुबाइयाँ-एक चीज़ है जो अभी
धनियों के तो धन हैं लाखों
धरा को उठाओ, गगन को झुकाओ
न बनने दो
नारी
नीरज गा रहा है
पपिहरा उठा पुकार पिया नहीं आये
प्राण ! मन की बात
प्रेम को न दान दो
प्रेम-पथ हो न सूना कभी इसलिए
पाती तक न पठाई
पीर मेरी, प्यार बन जा
प्यार की कहानी चाहिए
प्यार न होगा
बदन पे जिसके शराफ़त का पैरहन देखा
बन्द करो मधु की रस-बतियां
बसंत की रात
बुलबुल और गुलाब
बेशरम समय शरमा ही जाएगा
मगर निठुर न तुम रुके
मन क्या होता है
मस्तक पर आकाश उठाये
मानव कवि बन जाता है
मुक्तक (बादलों से सलाम लेता हूँ)
मुझको याद किया जाएगा
मुझे तुम भूल जाना
मुस्कुराकर चल मुसाफिर
मेरा गीत दिया बन जाये
मेरा इतिहास नहीं है
मेरे जीवन का सुख
मैं अकंपित दीप प्राणों का लिए
मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं
मैं तो तेरे पूजन को
यदि वाणी भी मिल जाए दर्पण को
लगन लगाई
विदा-क्षण आ पहुंचा
विरह रो रहा है, मिलन गा रहा है
विश्व चाहे या न चाहे
सावन के त्योहार में
साँसों के मुसाफिर
सेज पर साधें बिछा लो
स्नेह सदा जलता है
स्वप्न झरे फूल से (कारवां गुज़र गया)
हज़ारों साझी मेरे प्यार में
हम तेरी चाह में, ऐ यार ! वहाँ तक पहुँचे
हम सब खिलौने हैं
हर दर्पन तेरा दर्पन है
है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए

Poetry in Hindi Gopal Das Neeraj

Aadi Purush
Aadmi Ko Pyar Do
Aaj Ji Bhar Dekh Lo Tum Chand Ko
Aaj Mere Kanth Mein
Ab Ke Sawan Mein Yeh Shararat Mere Sath Hui
Ab To Mazhab Koi Aisa Bhi Chalaya Jaye
Ab Tum Rootho Roothe Sab Sansar
Adhikar Sabka Hai Barabar
Andhiyar Dhal Kar Hi Rahega
Asprishya
Badan Pe Jiske Sharafat Ka Pairahan Dekha
Band Karo Madhu Ki Ras-Batian
Basant Ki Raat
Besharam Samay Sharma Hi Jayega
Bulbul Aur Gulab
Chah Manzil Ki
Chalte Chalte Thak Gaye Pair
Char Vichar
Chhai Rubaiyan
Chhip Chhip Ashru Bahane Walo
Deep Aur Manushya
Dhaniyon Ke To Dhan Hain Lakhon
Dhara Ko Uthao
Diya Jalta Raha
Door Nahin To
Door Se Door Talak Ek Bhi Drakht Na Tha
Do Rubaiyan-Ek Cheez Hai Jo Abhi
Dukh Ke Din
Dukh Ne Darwaza Khol Diya
Ek Jug Baad Shab-e-Gham Ki Sehar Dekhi Hai
Ek Tere Bina Pran O Pran Ke
Ek Vichar
Gumnamiyon Mein Rehna Nahin Hai Kabool Mujhko
Hai Bahut Andhiyar Ab Suraj Nikalana Chahiye
Ham Sab Khilaune Hain
Ham Teri Chah Mein Ai Yar Wahan Tak Pahunche
Har Darpan Tera Darpan Hai
Hazaron Saajhi Mere Pyar Mein
Jab Bhi Is Shahar Mein Kamre Se Main Bahar Nikla
Jab Chale Jayenge Sawan Ki Tarah
Jalao Diye Par Rahei Dhayan Itna
Jitna Kam Saamaan Rahega
Khag Udte Rehna Jeevan Bhar
Khushbu Si Aa Rahi Hai Idhar Jafran Ki
Koi Moti Goonth Suhagin
Magar Nithur Na Tum Rukey
Main Akampit Deep
Main Toofano Mein Chalne Ka Aadi Hoon
Main To Tere Poojan Ko
Manav Kavi Ban Jata Hai
Man Kya Hota Hai
Mastak Par Aakash Uthaye
Mera Geet Diya Ban Jaye
Mera Itihas Nahin Hai
Mujhe Tum Bhool Jana
Mujhko Yaad Kiya Jayega
Muktak (Badlon Se Salaam)
Muskurakar Chal Musafir
Nari
Neeraj Ga Raha Hai
O Badar Kaare
O Har Subah Jagane Wale
O Pyase
O Pyase Adharonwali
Paati Tak Na Pathayi
Papihara Utha Pukar Piya Nahin Aaye
Payar Ki Kahani Chahiye
Peer Meri Payar Ban Ja
Pran Man Ki Baat
Prem Ko Na Daan Do
Prem Path Ho Na Soona
Pyar Na Hoga
Sanson Ke Musafir
Sawan Ke Tyohar Mein
Sej Par Saadhen Bichha Lo
Sneh Sada Jalta Hai
Swapan Jhare Phool Se-Karvan Guzar Gaya
Tab Meri Peera Akulaai
Tab Tum Aaye
Tamam Umar Main Ek Ajnabi Ke Ghar Mein Raha
Tan To Aaj Sawtantar Hamara
Timir Dhalega
Tum Diwali Bankar
Tumhare Bina Aarti Ka Diya
Tum Jhoom Jhoom Gao
Tu Utha To Uth Gayi Sari Sabha
Udjan Bomb Ke Prikshan Par
Unki Yaad Hamein Aati Hai
Vida-Kshan Aa Pahuncha
Virah Ro Raha Hai Milan Ga Raha Hai
Vishav Chahe Ya Na Chahe
Yadi Vani Bhi Mil Jaye Darpan Ko
 
 
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