हज़रत सुलतान बाहू (Hazrat Sultan Bahu)

हज़रत सुलतान बाहू (१६३१ - १६९१) का जन्म झंग ज़िले के गाँव अवाण में हुआ। उनके पिता बाजिद मुहम्मद और माता बीबी रासती-कुद्स-सरा शांत स्वभाव के थे। कहते हैं कि बचपन में ही उनके चेहरे से ईश्वरीय नूर टपकता था। उनका सम्बन्ध सूफ़ी के कादरी सिलसिले के साथ है। हज़रत हबीब-उल्ला उनके मुर्शिद थे। वह शराह के विरोधी नहीं थे। उनकी रचना में सोज़ है। वह बाकी सूफ़ी संतों की तरह 'मौत से पहले मरने' में यकीन रखते थे। उनकी अधिक रचना फ़ारसी में है। आपकी फ़ारसी किताबें नूर-उल-हुदा (रहनुमाई की रौशनी) और रिसाला-ए-रूही (आत्मा की किताब) अधिक प्रसिद्ध हैं। पंजाबी में उन्होंने सीहरफ़ियां लिखी हैं।

हज़रत सुलतान बाहू