Hindi Kavita
उदयभानु हंस
Uday Bhanu Hans
 Hindi Kavita 

उदयभानु हंस

उदयभानु हंस (२ अगस्त १९२६ ) का जन्म दायरा दीन पनाह मुज़फ्फरगढ़ पंजाब (पाकिस्तान) में हुआ था। आप हरियाणा के राज्य कवि हैं और हिंदी ‘रुबाई' के प्रवर्तक कवि हैं जो 'रुबाई सम्राट' के रूप में लोकप्रिय हैं। आपकी रचना 'हिंदी रुबाइयां' 1952 में प्रकाशित हुई थी । आपकी संपूर्ण रचना 'उदयभानु हंस रचनावली' (दो खण्ड ( कविता), दो खण्ड ( गद्य) के रूप में प्रकाशित हो चुकी है । आपकी रचनायों में, भेड़ियों के ढंग, हंस मुक्तावली, संत सिपाही, देसां में देस हरियाणा, शंख और शहनाई शामिल हैं।


हिन्दी कविता उदयभानु हंस

मत जियो सिर्फ़ अपनी खुशी के लिए
आदमी खोखले हैं पूस के बादल की तरह
ज़िंदगी फूस की झोंपड़ी है
बैठे हों जब वो पास, ख़ुदा ख़ैर करे
जी रहे हैं लोग कैसे आज के वातावरण में
मन में सपने अगर नहीं होते
कब तक यूं बहारों में पतझड़ का चलन होगा
तू तो सौंदर्य का विकास लगे
भेड़ियों के ढंग
मैं तुझसे प्रीत लगा बैठा
उठो फूट के पात्र को फोड़ डालो
हाइकु
दीवाली

Hindi Poetry Udaybhanu Hans

 
 
 Hindi Kavita