एखलाक ग़ाज़ीपुरी की रचनाएँ
अंतर्द्वंद्व : कविता अनुक्रमणिका
- 1. अन्तर्द्वन्द
- 2. भारत भाग्य संवारो तुम
- 3. सब मिल कर इनको नमन करो
- 4. कब तक लहू लजायेगा
- 5. अब राजधर्म का पालन हो
- 6. मैं माटी का पुतला मेरा प्यार माटी
- 7. टुकड़े टुकड़े पहरों में
- 8. जाने क्या क्या छूटेगा
- 9. ऑनलाइन अब शोर बहुत है
- 10. सबके हों ये काबा काशी
- 11. कैसी दुनिया हमारी अजब रंग है
- 12. नयी नसल का फितूर है ये
- 13. देखो मैं ही प्रथम प्रतिनिधि
- 14. गरिमा खण्डित होती है
- 15. इन्सान हो तुम सीखो
- 16. जयचंद नहीं हूँ
- 17. बुरी है रीत दुनियां की
- 18. फर्क न होगा अंतिम क्षण में
- 19. अब तो ऐसा अक्सर होता है
- 20. मानव के अवतार में आ
- 21. वहाँ तुम्हारी कलम जगे
- 22. भ्रष्ट व्यवस्था के शायद हम सब ही कर्ता धर्ता हैं
- 23. क्या अधिकार हमें है बोलो
- 24. सेना में भारत बसता है
- 25. सेना का अभिमान रहे
- 26. सब मील के पत्थर उखड़ गए
- 27. दुःशासन के अवतार बहुत
- 28. कुछ मोल गंवाने ही होंगे
- 29. अब राष्ट्रध्वजा फहराने दो
- 30. उनके जीवन का सुख राम के पास हो
- 31. बस एक जटायु के जैसा
- 32. यहाँ बेईमानी दुष्कर्म नहीं
- 33. बस इसको अविरल रहने दो
- 34. ये फिर तुमको फुसला लेंगे
- 35. खेल तुम्हारा ठीक नहीं
- 36. पत्थर का बदला गोली हो
- 37. अब गोविंद न आएंगे
- 38. तुम्हें लड़ने का अधिकार नहीं
- 39. सच्चा धर्म वही होता है
- 40. देश हमारा लूट लियो
- 41. अब आज का भारत ऐसा है
- 42. उनका शोषण होता है
- 43. फिर अपना झण्डा गड़ा रहेगा
- 44. याद वही रह जाएगा
- 45. सुनो राधिका अब कन्हैया नहीं हैं
- 46. अपना हिंदुस्तान लिखो
- 47. समुचित मोल चुकाया जाए
- 48. उससे बढ़कर कौन भला है
- 49. अपना कोई मोल नहीं
- 50. तेरे इश्क में वफा की ऐसी मिसाल दूँ मैं
- 51. हम किसके क्या क्या होते थे
- 52. मुझे आदमी का ख़िताब दे
- 53. मुझको तुम मजदूर रख लो
- 54. तुमसे बेहतर कौन करे है
- 55. मैं तेरा दीवाना नहीं रहा
- 56. कोई जुर्म नहीं क़ातिल का अब
- 57. मैं कैस तुम्हारा हूँ
- 58. है शौक बहुत मंहगा हमने जिसे पाला है
- 59. यहाँ मुहब्बत में रहजनी है
- 60. हमारी उल्फ़त की पाक चादर
- 61. तुम मुझसे मिलने आ जाना
- 62. तेरे मुकाबिल खड़ा हूँ मैं
