Jibanananda Das (जीवनानंद दास)
जन्म: 18 फ़रवरी 1899 (बारीसाल, बांग्लादेश) | निधन: 22 अक्टूबर 1954 (कोलकाता)
साहित्यिक युग: 20वीं सदी के आधुनिक बांग्ला काव्य के अग्रदूत
मुख्य विधाएँ: कविता, उपन्यास, कहानी, निबंध
साहित्यिक अवदान: जीवनानंद दास रवींद्रोत्तर बांग्ला साहित्य के सबसे लोकप्रिय और महत्वपूर्ण कवि माने जाते हैं। उनके जीवनकाल में उनका साहित्य घोर गरीबी और उपेक्षा में बीता, लेकिन मरणोपरांत उन्हें अपार ख्याति मिली। उन्होंने अपने जीवनकाल में गुप्त रूप से 14 उपन्यास और 108 लघु कथाएँ लिखीं। प्रकृति, इतिहास-चेतना, एकांत और मानवीय संवेदनाओं का अद्वितीय संयोजन उनकी कविताओं की विशेषता है।
प्रमुख कृतियाँ: झरा पालोक (1927), धूसर पाण्डुलिपि (1936), बनलता सेन (1942), महापृथ्वी (1944), सातटि तारारा तिमिर (1948), श्रेष्ठ कविता (1954), रूपसी बांग्ला (1957), बेला अबेला कालबेला (1961)।
सम्मान एवं पुरस्कार: रवींद्र-स्मारक पुरस्कार (1953, बनलता सेन हेतु), साहित्य अकादमी पुरस्कार (1955, श्रेष्ठ कविता हेतु)।
जीवनानंद दास के प्रमुख काव्य-संग्रह (Quick Index)
झड़ा पालक (ঝরা পালক)
अनुवादक: समीर वरण नंदी
धूसर पांडुलिपि (ধূসর পাণ্ডুলিপি)
अनुवादक: समीर वरण नंदी / सुशील कुमार झा
रूपसी बांग्ला (রূপসী বাংলা)
अनुवादक: समीर वरण नंदी / सुशील कुमार झा
बनलता सेन (বনলতা সেন)
अनुवादक: समीर वरण नंदी / सुशील कुमार झा
- कट चुका धान
- राह चलना
- बनलता सेन
- मुझे तुमने
- तुम
- अन्धकार
- सुरंजना
- सविता
- सुचेतना
- हज़ारों साल के खेल
- शव
- हाय चील
- सिन्धुसारस
- बीस साल बाद
- घास
- तेज़ हवा की रात
- वनहंस
- शंख माला
- बिल्ली
- शिकार
- नग्न निर्वसन हाथ
- एक दिन आठ साल पहले
- बनलता सेन
- अन्धकार
- हाय चील
- बीस साल बाद
- झंझावत की एक रात
- शिकार
- नग्न निर्जन हाथ
- हज़ार साल
- यदि मैं होता
- बेबीलोन से कोलकाता
- जीवन का लेन देन
सातटि तारार तिमिर (সাতটি তারার তিমির)
अनुवादक: समीर वरण नंदी / सुशील कुमार झा
बेला अबेला कालबेला (বেলা অবেলা কালবেলা)
अनुवादक: समीर वरण नंदी / सुशील कुमार झा
महापृथ्वी (মহাপৃথিবী)
अनुवादक: सुशील कुमार झा
